Alka Sinha- Hindi Writer and Anchor

बहुमुखी प्रतिभा की धनी अलका सिन्हा एक संवेदनशील लेखिका, प्रगतिशील महिला और जागरूक पत्रकार हैं। दूरदर्शन एवं आकाशवाणी के विभिन्न कार्यक्रमों में अपनी आवाज का जादू बिखरने वाली अलका एअर इंडिया में बतौर अनुवादक कार्यरत है। अपनी रचनाओं एवं कार्यों के लिए अनेक राष्ट्रीय एवं अंतराष्ट्रीय सम्मानों से सम्मानित हुई हैं।

Alka Sinha-बहुमुखी प्रतिभा की धनी अलका सिन्हा एक संवेदनशील लेखिका, प्रगतिशील महिला और जागरूक पत्रकार हैं। दूरदर्शन एवं आकाशवाणी के विभिन्न कार्यक्रमों में अपनी आवाज का जादू बिखेरने वाली अलका सिन्हा एअर इंडिया में बतौर अनुवादक कार्यरत हैं। वे अपनी रचनाओं एवं कार्यों के लिए अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से सम्मानित हुई हैं।

अलका सिन्हा का जन्म 09 नवम्बर को भागलपुर, बिहार में हुआ। पिता श्री सीताराम प्रसाद एक जागरूक व्यक्ति हैं। कुशाग्र बुद्धि के सीताराम प्रसाद अपने गांव के पहले व्यक्ति थे, जिन्होंने उच्च शिक्षा ग्रहण की। आगे चलकर उन्होंने इंटेलीजेंस ब्यूरो में अपनी विशिष्ट सेवा प्रदान की। माता चंपकलता धार्मिक विचारों वाली घरेलू महिला हैं। पिता के व्यक्तित्व से प्रभावित अलका सिन्हा अपने माता-पिता को अपनी सबसे बड़ी शक्ति मानती हैं।

चार बहन और एक भाई में दूसरे नंबर की अलका सिन्हा जहां कुशाग्रबुद्धि की थीं, वहीं थोड़ी हठी भी थीं। कहीं भी गलत हो, उसे सहन करना तो मानो सीखा ही न था। स्वभाव से निडर अलका जी ने अनेक चुनौतियों का दृढ़तापूर्वक सामना किया। पत्थर की तरह अपने इरादों में मजबूत अलका सिन्हा कोमल हृदया हैं। जब भी किसी को जरूरत हो, ये सहयोग के लिए हमेशा तत्पर रहती हैं।

दिनांक 06 जुलाई, 1989 को इनका विवाह मनोज कुमार सिन्हा से हुआ। ब्याह कर जब ये अपनी ससुराल मुंगेर आईं  तो आम लड़कियों की तरह इनके मन में भी दुविधा थी। पर ससुराल का माहौल अच्छा था। परिवार के सभी सदस्यों का रवैया सहयोगपूर्ण था। साहित्यिक और सांस्कृतिक परिवेश से संपन्न इनके ससुराल परिवार ने सदा ही इनकी साहित्यिक प्रतिभा का स्वागत और सम्मान किया। इनके श्वसुर मिथिलेश कुमार सिन्हा एवं ममतामयी सास इंदु सिन्हा ने न केवल इन्हें प्रोत्साहित ही किया वरन हर कदम पर इनका सहयोग भी किया।

इनके पति मनोज कुमार सिन्हा वर्तमान में मिनिस्टरी आफ साइंस एण्ड टेक्नोलोजी में वरिष्ठ अनुवादक हैं। मनोज जी स्वयं साहित्य के छात्र रहे हैं। संगीत, कला, साहित्य में न केवल इनकी रुचि ही है वरन अच्छी पकड़ भी है। अलका जी के कार्यों में हमेशा इनका रवैया सहयोगपूर्ण रहता है, हमेशा इनके लेखन को प्रोत्साहन प्रदान करते रहते हैं। ये पूछे जाने पर कि कभी आपके बीच अहम का टकराव भी होता है? मुस्कुराते हुए उनका जवाब होता है – हम दो हों तो टकराव की संभावना भी होती पर हम अलग नहीं हैं। उनका कहना है कि अलका जी सुनियोजित और व्यवस्थित ढंग से काम करती हैं। व्यक्तिगत जीवन तथा व्यावसायिक पहलू पर सुंदर संतुलन कायम रखती हैं।

अलका सिन्हा की दो बेटियां हैं, दोनो ही होनहार और प्रतिभावान। बड़ी बेटी प्राची इंजीनियरिंग द्वितीय वर्ष की छात्रा हैं। छोटी शाद्वल कक्षा नौ में अध्ययनरत हैं। दोनों को ही साहित्यिक प्रतिभा विरासत में मिली है। प्राची ने स्कूल, कालेज स्तर तक अनेक उपलब्धियां हासिल की हैं। वहीं शाद्वल की मात्र  ग्यारह वर्ष की उम्र में कहानियों का संग्रह छप चुका है।

काफी छोटी उम्र में अलका जी कवितायेँ लिखने लगी थीं । उन्होंने पहली कहानी ‘मिनी’ लिखी जो बाल-मनोविज्ञान पर आधारित है। इनकी पहली प्रकाशित कहानी ‘गुड्डो का स्कूल’ है जिसे दैनिक हिन्दुस्तान ने प्रकाशित किया। कहानी संग्रह  ’सुरक्षित पंखों की उड़ान’ नागर विमानन सुरक्षा पर आधारित कहानियों का संग्रह है। ये कहानियां आतंकवाद की सूरत पहचानने में हमारी मदद करती हैं। इन तकनीकी कहानियों में लेखन के नितांत मौलिक और बदलते ट्रैंड को देखा जा सकता है। इनके अलावा कड़ी, चाहत, अपूर्णा, चौराहा, चांदनी चौक की जुबानी जैसी अनेक कहानियां सामाजिक सरोकार को रेखांकित करती हैं।

अलका सिन्हा से जुड़ी संक्षिप्त जानकारी:

नाम- अलका सिन्हा

जन्म- 09 नवम्बर 1964

शिक्षा- एम. बी. ए., एम. ए., पी. जी. डी. टी.,

केन्द्रीय अनुवाद ब्यूरो, गृह मंत्रालय द्वारा संचालित अनुवाद प्रशिक्षण कार्यक्रम में रजत पदक

काव्य संग्रह-

काल की कोख से

मैं ही तो हूं ये

तेरी रोशनाई होना चाहती हूं

कहानी संग्रह-

सुरक्षित पंखों की उड़ान

उपलब्धियां-

देश-विदेश की कई पत्रिकाओं में विभिन्न भाषाओं में कवितायें प्रकाशित

आकाशवाणी की विदेश प्रसारण सेवा द्वारा दर्जनों कहानियां नेपाली में अनूदित और प्रसारित

प्रतिष्ठित पब्लिक स्कूलों के हिन्दी विषय के पाठयक्रम में कहानी सम्मिलित

बी. बी. सी. से कविताओं का प्रसारण

अनेक कहानी, कविता, समीक्षात्मक निबंध आकाशवाणी व दूरदर्शन से प्रसारित

सम्मान-

काव्य संग्रह  ’मैं ही तो हूं ये’ पर हिन्दी अकादमी, दिल्ली सरकार द्वारा साहित्यिक कृति-सम्मान   (2002)

सामाजिक, सांस्कृतिक एवं साहित्यिक संस्था ‘उदभव’ द्वारा साहित्य के लिए मानव सेवा सम्मान  (2004)

प्रवासी संगठन, नई दिल्ली द्वारा साहित्य के लिए प्रवासी रत्न सम्मान (2004)

एम. जे. पी. रूहेलखंड विश्वविद्यालय के आर. बी. डी. स्नातकोत्तर महिला महाविद्यालय, बिजनौर (उत्तर प्रदेश) में वर्ष 2005 में आयोजित अखिल भारतीय सेमिनार में विषय मर्मज्ञ (रिसोर्स पर्सन) के रूप में सम्मानित

विक्रमशिला हिन्दी विद्यापीठ, भागलपुर द्वारा ‘कवि रत्न’ की उपाधि (2007)

समकालीन साहित्य मंच, मुंगेर द्वारा लाला जगत ज्योति स्मृति सम्मान (2008)

विशिष्ट गतिविधियां-

भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद के सौजन्य से ब्रिटेन के विभिन्न शहरों में वर्ष 2008 में काव्य पाठ

छठे विश्व हिन्दी सम्मेलन, लंदन में शोधपत्र का पाठ

गत दस वर्षों से गणतंत्र-दिवस परेड का आंखों देखा हाल सुनाने का गौरव

चौथी दिल्ली विधान सभा के उदघाटन सत्र की रे़डियो कमेंटेटर

दिल्ली दूरदर्शन के साहित्यिक कार्यक्रम ‘पत्रिका’ की विशिट श्रृंखलाओ की प्रस्तोता

आकाशवाणी की विदेश प्रसारण सेवा में पूर्व हिन्दी उदघोषक

एअरलाइन्स कर्मियों को उदघोषणा संबंधी जानकारी देने के लिए आयोजित वाइस कल्चर ट्रेनिंग में फैकल्टी पर्सन

अंतर्राष्ट्रीय लेखन से जुड़ी हिन्दी की साहित्यिक पत्रिका ‘अक्षरम संगोष्ठी’ की सह-संपादक (मानद और अवैतनिक)

अनेक मूर्धन्य साहित्यकारों से साक्षात्कार प्रकाशित एवं प्रसारित

बाल-पत्रिका ‘नंदन’ के स्थायी स्तंभ ‘विश्व की महान कृतियां’ के लिए अनेक हिन्दीतर कृतियों का हिन्दी कहानी रूपांतरण

राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एन. सी. ई. आर. टी.) के श्रव्य-दृश्य शिक्षण कार्यक्रमों का प्रस्तुतीकरण

दिल्ली विश्वविधालय से अनुवाद की अतिथि प्राध्यापक के रूप में सबद्ध

केन्द्रीय सचिवालय हिन्दी परिषद की पूर्व ‘साहित्य एवं संस्कृति मंत्री’

परिचय साहित्य परिषद की सचिव

विभिन्न साहित्यिक-सांस्कृतिक कार्यक्रमों का संयोजन-संचालन

संपर्क-

371, गुरू अपार्टमेंटस, प्लाट नं.- 2, सेक्टर- 6, द्वारका, नई दिल्ली 110075

ई-मेल- alkasays@gmail.com

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Sub Editor: Bhartiya Paksha

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