Arun Shourie : Writer, Journlist and Politician

1979 में अरुण शौरी इंडियन एक्सप्रेस में एक्सक्यूटिव एडिटर बने। उनके कार्यकाल के दौरान इंडियन एक्सप्रेस ने कई बड़े-बड़े घोटालों को उजागर किया।

arun Arun Shourie : Writer, Journlist and Politician-अरुण शौरी का जन्म 2 नवम्बर 1941 को हुआ। अरुण शौरी के पिता का नाम हरि देव शौरी था। वो उस समय लाहौर के मजिस्ट्रेट थे जब भारत-पाकिस्तान का बंटवारा हुआ। उनके पिता परिवार सहित भारत आ गये। बाद में उनके पिता सामाजिक कार्यकर्ता बन गये।

अरुण शौरी की पत्नी का नाम अनीता शौरी है। उनके एक पुत्र है। इनकी बहन नलिनी सिंह भी जानी-मानी पत्रकार हैं।

अरुण शौरी ने स्कूली शिक्षा माडर्न स्कूल, दिल्ली से ली और उच्च शिक्षा दिल्ली के ही सेंट स्टीफन कालेज से। बाद में वो अमेरिका चले गये जहां उन्होंने अर्थशास्त्र में डाक्टरेट की उपाधि ग्रहण की।

अरुण शौरी पत्रकार हैं, लेखक हैं और राजनीतिज्ञ भी हैं। दो बार वो विश्व बैंक के अर्थशास्त्री भी रह चुके हैं। योजना आयोग के सलाहकार का कार्य भी उन्होंने किया है।

1979 में अरुण शौरी इंडियन एक्सप्रेस में एक्सक्यूटिव एडिटर बने। उनके कार्यकाल के दौरान इंडियन एक्सप्रेस ने कई बड़े-बड़े घोटालों को उजागर किया। 1981 में महाराष्ट्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री अब्दुल रहमान अंतुले के खिलाफ तो उन्होंने धर्मयुद्ध छेड़ दिया। अंतुले पर यह आरोप लगाया गया कि वो राज्य की काफी सम्पत्ति गैरकानूनी तरीके से इंदिरा गांधी के नाम से बने ट्रस्ट को दे रहे हैं। इस कारण अंतुले को त्याग पत्र देना पड़ा।

अंतुले ने इसका बदला लेते हुए एक मजदूर संगठन के सहारे इंडियन एक्सप्रेस के मुम्बई कार्यालय में हड़ताल करवा दी। सरकार ने अखबार के मालिक रामनाथ गोयनका पर दबाव बनाया जिस कारण अरुण शौरी को इंडियन एक्सप्रेस छोड़नी पड़ी। 1982 से 86 तक वो कई अखबारों में कालम लिखते रहे। 1986 में उन्होंने टाइम्स आफ इंडिया में काम करना शुरू किया लेकिन 1987 में वो फिर से इंडियन एक्सप्रेस में आ गये।

इस बार उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री को कठघरे में खड़ा करते हुए बोफोर्स घोटाले का पर्दाफाश किया। राजीव गांधी के आगामी लोकसभा में चुनाव हारने का यह भी एक कारण बना।

1986 में इंडियन एक्सप्रेस की लगाम कसने के लिए सरकार डीफेमेशन बिल लाने पर उतारू हो गई। अरुण शौरी ने इसका बहुत विरोध् किया और अपने साथ पूरे मीडिया जगत को ले लिया।

एक समय इंडियन एक्सप्रेस के खिलाफ 300 मामले न्यायलय में दाखिल किये गये थे और बैंकों की तरफ से अखबार को सहायता रोक दी गई थी। इसके बावजूद अखबार सरकार के भ्रष्टाचार को उजागर करता रहा। 1990 में अरुण शौरी को इंडियन एक्सप्रेस छोड़नी पड़ी। क्योंकि संपादकीय नीति से उनका विरोध हो गया।

मंडल कमीशन द्वारा ओबीसी को भी सरकारी नौकरियों में आरक्षण का वो विरोध कर रहे थे, इस कारण यह सब हुआ। उसके बाद अरुण शौरी ने पुस्तके लिखने में अपनी ऊर्जा लगाई। इसके अलावा वो अखबारों में कालम भी लिखते रहे।

अरुण शौरी भारतीय जनता पार्टी की ओर से राज्य सभा के सदस्य बने । उन्होंने विनिवेश मंत्री के रूप में भी देश को अपनी सेवाएं दी। विनिवेश मंत्री के रूप में उनका कार्यकाल काफी विवादास्पद रहा। एक सर्वे में उन्हें वाजपेयी मंत्रिमंडल का सबसे अच्छा मंत्री माना गया।

पुरस्कार :

पद्म भूषण, मैगसेसे एवार्ड, दादाभाई नौरोजी एवार्ड, एस्टर एवार्ड आदि ।

उनकी लिखी प्रमुख पुस्तकें :

आर वी डीसीविंग अवरसेल्व अगेन

वेअर वील आल दिस टेक अस

हारवेसटिंग अवर सॉल्स

इंडियन कान्टरवर्सिस

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Working as Associate Editor of Bhartiya Paksha, a monthly magazine published from New Delhi. To know more click to

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