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भारतीय राजनीति के श्रेष्ठ विश्लेषकों में वेद प्रताप वैदिक का नाम आता है। इन्होंने लगभग एक दशक तक प्रेस ट्रस्ट आफ इंडिया के लिए काम किया है। इसकी हिंदी समचार एजेंसी के वे संस्थापक संपादक थे। इससे पहले वो नवभारत टाइम्स के संपादक भी रह चुके हैं। |
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-भारतीय राजनीति के श्रेष्ठ विश्लेषकों में वेद प्रताप वैदिक का नाम आता है। इनके द्वारा अखबारों में लिखे गये लेख बड़ी गंभीरता से पढ़े जाते हैं। इन्होंने लगभग एक दशक तक प्रेस ट्रस्ट आफ इंडिया के लिए काम किया है। इसकी हिंदी समचार एजेंसी के वे संस्थापक संपादक थे। इससे पहले वो नवभारत टाइम्स के संपादक भी रह चुके हैं।
वेद प्रताप वैदिक का जन्म 30 दिसम्बर 1944 को हुआ। स्कूल में ये हमेशा प्रथम स्थान पाते रहे। 1971 में में उन्होंने जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यायल से पीएचडी पूरी की। विषय था अंतराष्ट्रीय संबंध्।
अपनी पीएचडी की थीसीस हिंदी में लिखने के कारण वैदिक को संस्थान से निकाल दिया गया।
इस पर पूरे देश ने तीखी प्रतिक्रिया दर्ज कराई। भारतीय संसद में इस विषय पर काफी चर्चा हुई। आखिरकर वेद प्रताप वैदिक ने जंग जीती। छात्रों को यह अधिकार प्रदान किया गया कि ये अपनी मातृभाषा में पीएचडी की थीसिस लिख सकते हैं।
उसके बाद 1962 से वेद प्रताप वैदिक भारतीय और विदेशी टेलीविजन पर कई कार्यक्रमों में आने लगे। एक दर्जन से ज्यादा अखबारों ने उनके कालम प्रकाशित करने शुरू कर दिये। कई विश्वविद्यालयों की तरफ से राजनीति पर बोलने के लिए उन्हें आमंत्रित किया जाने लगा।
उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के मोती लाल नेहरू कालेज में राजनीति शास्त्र पढ़ाना शुरू किया।
वैदिक रशियन, परशियन, अंग्रेजी, संस्कृत, हिंदी के अलावा कई अन्य भारतीय भाषाएं जानते हैं।
अपने शोध के दौरान वेद प्रताप वैदिक ने न्यूयार्क, लंदन और मास्को के शिक्षण संस्थानों में अध्ययन किया। अफगानिस्तान का कोना-कोना उन्होंने परख लिया। विदेशी मामलों के विशेषज्ञ होने के कारण वैदिक भारतीय मंत्रियों और कई विदेशी नेताओं की जरूरत बन गए। 1999 में वो सयुंक्त राष्ट्र में भारतीय प्रतिनिधिमंडल के सदस्य भी बने।
वेद प्रताप वैदिक अब तक करीबन 60 देशों की यात्रा कर चुके हैं। वो भारतीय सरकार की कई सलाहकार समितियों के सदस्य भी रह चुके हैं। इस समय वो काउंसिल फार इंडियन फारन पालिसी और भारतीय भाषा सम्मेलन के चैयरमैन हैं।
वेद प्रताप वैदिक ने अफगानिस्तान से संबंधित दो पुस्तकें और 80 लेख लिखे हैं। उनका अफगानिस्तान के अध्यक्ष, प्रधानमंत्री सहित कई प्रमुख नेताओं से सीधा संपर्क है।
प्रमुख पुस्तकें :
अंग्रेजी हटाओ: क्यों और कैसे
एथनिक क्राइसिस इन श्रीलंका
पुरस्कार :
विश्व हिंदी सम्मान
पत्रकारिता भूषण सम्मान



























2 Comments
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