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मात्र ग्यारह वर्ष की छोटी सी उम्र में साहित्य के क्षेत्र में अपनी एक पहचान बना चुकी नन्ही रचनाकार शादवल का जन्म 5 दिसम्बर 1995 में हुआ। |
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-मात्र ग्यारह वर्ष की छोटी सी उम्र में साहित्य के क्षेत्र में अपनी एक पहचान बना चुकी नन्ही रचनाकार शादवल का जन्म 5 दिसम्बर 1995 में हुआ। पिता मनोज कुमार सिन्हा मिनिस्टरी आफ साइंस एंड टेक्नोलोजी में वरिष्ठ अनुवादक हैं। मां अलका सिन्हा हिंदी की जानी-मानी लेखिका और एअर इंडिया में अनुवादक हैं।
शादवल दो बहने हैं- बड़ी बहन प्राची इंजीनियरिंग की छात्रा होने के साथ-साथ एक अच्छी कवियत्री भी हैं।
शादवल की अनेक रचनाएं देश की विभिन्न प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में छप चुकी है। इनके द्वारा लिखित नाटक ‘सच्चा देशभक्त’ आकाशवाणी दिल्ली से प्रसारित हो चुकी है। आकाशवाणी इंद्रप्रस्थ से इनका साक्षात्कार भी प्रसारित हो चुका है।
मात्र ग्यारह वर्ष की उम्र में शादवल की कहानियों का संग्रह ‘मेरी ग्यारह कहानियां’ प्रकाशित हो चुकी है। जिसे काफी पसंद ही नही किया गया वरन् काफी सराहना भी मिली। इस पुस्तक का विमोचन “18वें नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेले (2–10 फरवरी 2008)” में वरिष्ठ कथाकार हिमांशु जोशी एवं वरिष्ठ कवि-ग़ज़लकार शेरजंग गर्ग ने किया।
वर्तमान में शादवल एक बाल पत्रिका ‘किल्लोल’ की बाल संपादिका भी हैं।
साहित्य एवं लेखन के अलावा शादवल की रूचि अन्य गतिविधियों में भी है। ये अपने स्कूल की ‘बेस्ट एथलीट’ है। गिटार और बांसुरी पर भी अपनी पकड़ बना रहीं हैं। काफी अच्छी स्केचिंग, पेंटिग इत्यादि बनाती हैं।
अक्सर कहा जाता है कि ऐसे बच्चे पढ़ाई में पिछड़ जाते हैं, परंतु शादवल ने इन बातों को गलत साबित कर दिया। कुशाग्र बुद्धि की शादवल बड़ी होकर वैज्ञानिक बनना चाहती हैं।

























