Lata Mangeshakar : The Melody Queen

भारत रत्न से सम्मानित लता जी भारत की सबसे लोकप्रिय गायिका हैं। अब तक इन्होंने लगभग तीस से भी ज्यादा भाषाओं में गायन किया है। इनकी सुमधुर आवाज में एक जादुई कशिश है। इन्होंने अपने कैरियर में दुनिया में सबसे ज्यादा गीत गाने का अभूतपूर्व रिकार्ड कायम किया है।

Lata Mangeshakar 200x196 Lata Mangeshakar : The Melody Queen-स्वर साम्राज्ञी, संगीत संसार की बड़ी दी यानि लता मंगेशकर का जन्म 28 सितम्बर 1929 को मध्यप्रदेश के एक शहर इंदौर में हुआ था। भारत रत्न से सम्मानित लता जी भारत की सबसे लोकप्रिय गायिका हैं। अब तक इन्होंने लगभग तीस से भी ज्यादा भाषाओं में गायन किया है। इनकी सुमधुर आवाज में एक जादुई कशिश है। इन्होंने अपने कैरियर में दुनिया में सबसे ज्यादा गीत गाने का अभूतपूर्व रिकार्ड कायम किया है। संगीत के प्रति पूर्णत: समर्पित लता जी का जीवन संगीत ही है।

परिवार का माहौल पूर्णत: संगीतमय है। इनके पिता पंडित दीनानाथ मंगेशकर प्रसिद्ध शास्त्रीय गायक और संगीतकार थे। माता शुद्धमती धार्मिक संस्कारो वाली घरेलू महिला थी। लता जी पांच भाई-बहनों में सबसे बड़ी थी। इनके भाई का नाम हृदयनाथ मंगेशकर है जो शास्त्रीय गायक होने के साथ-साथ संगीत निर्देशक भी हैं। इन्होंने हिन्दी एवं मराठी फिल्मों में संगीत दिया है। बहनों के नाम है उषा, मीना और आशा भोंसले। आशा भोंसले भी एक प्रतिष्ठित पार्श्वगायिका हैं।

मात्र पांच साल की आयु में इनके पिता ने इन्हें संगीत की तालीम देनी शुरु कर दी। बचपन से ही लता जी को संगीत से अगाढ़ प्रेम था। सुर-ताल पर इनकी पकड़ देखते ही बनती थी। इनकी प्रतिभा को देखते हुए पिता ने पहले ही घोषणा कर दी थी कि ये बहुत बड़ी गायिका बनेगी। जब लता जी सात साल की थी तब उनका पूरा परिवार मध्यप्रदेश से महाराष्ट्र आ गया।

पांच साल की अवस्था में ही पिता की थियेटर कंपनी में बतौर रंगमंच कलाकार भी काम किया पर अभिनय करना इन्हें पसंद नहीं था। इनकी तो सारी दुनिया संगीत थी। बचपन से ही लता गायिका बनना चाहती थी। संगीत में इनकी प्रतिभा को देखते हुए वसंत जोगलेकर ने इन्हें अपनी फिल्म ‘कीर्ति हसाल’ में सबसे पहले गाने का मौका दिया। पर लता के पिता को पसंद नहीं था कि लता फिल्मों के लिए गाये इसलिए गाने को फिल्म से निकाल दिया गया। इनका बचपन काफी संघर्ष में बीता।

जब ये मात्र तेरह साल की थी इनके पिता की मृत्यु हो गई। पूरे परिवार की जिम्मेदारी लता के कंधों पर आ गई। अभिनय को नापसंद करने वाली लता जी ने परिवार की आजीविका के लिए फिल्मों में अभिनय करना शुरु कर दिया। अभिनेत्री के रुप में उनकी पहली फ़िल्म ‘पाहिली मंगलागौर’ (1942) रही, जिसमें उन्होंने स्नेहप्रभा प्रधान की छोटी बहन की भूमिका निभाई। बाद में उन्होंने कई फ़िल्मों में अभिनय किया जिनमें, माझे बाल, चिमुकला संसार (1943), गजभाऊ (1944), बड़ी माँ (1945), जीवन यात्रा (1946), माँद (1948), छत्रपति शिवाजी (1952) शामिल थी। ‘बड़ी माँ’ में लता ने नूरजहाँ के साथ अभिनय किया। लता जी सहगल साहब और नूरजहां की बहुत बड़ी प्रशंसक थी। उनके शुरुआती गानों में नूरजहां की गायन शैली का प्रभाव दिखता है।

1947 में वसंत जोगलेकर ने अपनी फ़िल्म ‘आपकी सेवा’ में लता को गाने का मौका दिया. इस फ़िल्म के गानों से लता की खूब चर्चा हुई। इसके बाद लता ने ‘मज़बूर’ फ़िल्म के गानों “अंग्रेजी छोरा चला गया” और “दिल मेरा तोड़ा हाय मुझे कहीं का न छोड़ा तेरे प्यार ने” जैसे गानों से अपनी स्थिती सुदृढ की।

लता के लिए सबसे बड़ी चुनौती थी उनकी पतली आवाज क्योंकि उस समय भारी और नाक से गाने वाले आवाज का चलन था। अपने-आप को स्थापित करने के लिए इन्हे काफी संघर्ष करना पड़ा। उस समय का स्थापित गायिकाएं अमीरबाई, शमशाद बेगम, राजकुमारी एवं अन्य के बीच अपनी पहचान बनाना आसान नहीं था पर लता विचलित नहीं हुई अनवरत एक साधक की तरह अपने कार्य को करती रहीं। कार्य के प्रति समर्पण और संगीत के प्रति अनन्य श्रद्धा से ही उन्होंने एक मुकाम बनाया है।

1949 उनकी जिंदगी का सबसे जबरदस्त मोड़ साबित हुआ। जब उनके द्वारा गाया गया फिल्म ‘महल’ का गीत ‘आयेगा आनेवाला’ सुपर हिट हुआ। इसके साथ ही फिल्म ‘अंदाज’ तथा ‘बरसात’ के गाने भी काफी हिट हुए। इसके बाद लता जी लगातार कामयाबी की सीढ़ियां चढ़ती चली गई। 1958 में उन्हें फिल्म ‘मधुमती’ के गाने ‘आ जा रे परदेसी’ के लिए फिल्म फेयर अवार्ड से भी सम्मानित किया गया। उनके द्वारा गाये गये गीत ‘ऐ मेरे वतन के लोगो’ से तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित नेहरू इतने प्रभावित हुए कि उन्हें इस गीत के लिए 1969 में पद्मभूषण प्रदान किया।1980 के बाद से इन्होने फ़िल्मो मे गाना कम कर दिया और स्टेज शो पर अधिक ध्यान देने लगी।

क्रिकेट तथा फोटोग्राफी की शौकीन लता एकमात्र ऐसी जीवित शख्सियत हैं जिनके नाम से पुरस्कार दिए जाते हैं। इन्होंने आनंद गान बैनर तले फिल्मों का भी निर्माण किया है तथा कुछ फिल्मों में संगीत भी दिया। आज भी लता जी नंगे पांव ही गाने की रिकार्डिंग करती हैं। आजकल इनका ज्यादातर समय दीनानाथ अस्पताल के कार्यो में तथा संगीत साधना में बीतता है।

पुरस्कार :

फिल्म फेयर पुरस्कार (1958, 1962, 1965, 1969, 1993 and 1994)

राष्ट्रीय पुरस्कार (1972, 1975 and 1990)

महाराष्ट्र सरकार पुरस्कार (1966 and 1967)

1969 – पद्म भूषण

1974 – दुनिया मे सबसे अधिक गीत गाने का गिनीज़ बुक रिकॉर्ड

1989 – दादा साहब फाल्के पुरस्कार

1993 – फिल्म फेयर का लाइफ टाइम अचीवमेंट पुरस्कार

1996 – स्क्रीन का लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार

1997 – राजीव गांधी पुरस्कार

1999 – एन.टी.आर. पुरस्कार

1999 – पद्म विभूषण

1999 – ज़ी सिने का का लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार

2000 – आई. आई. ए. एफ. का लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार

2001 – स्टारडस्ट का लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार

2001 – भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान “भारत रत्न”

2001 – नूरजहाँ पुरस्कार

2001 – महाराष्ट्र रत्न

निर्देशित फिल्में :

वादल (मराठी)- 1953

झांझर (हिन्दी)- 1953

कंचन (हिन्दी)- 1955

लेकिन (हिन्दी)- 1990

संगीत निर्देशन :

राम-राम पाहवां- 1950

मराठा टिटुका मेलवावा- 1963

मोहित्यांची मंजुला- 1963

साधी मानसी- 1965

ताबड़ी माटी- 1969

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Sub Editor: Bhartiya Paksha

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