Shivraj Singh Chauhan : The Honeble Chief Minister Of Madhya Pradesh

श्री चौहान २००५ में म.प्र. भारतीय जनता पार्टी के अध्‍यक्ष नियुक्‍त किये गये। पेशे से किसान, श्री शिवराज सिंह चौहान सांस्‍कृतिक, सामाजिक और धार्मिक गतिविधियों में समर्पित रूप से सक्रिय रहे हैं। वे पिछले करीब पंद्रह वर्षों से गरीब कन्‍याओं का सामूहिक विवाह कराते आ रहे हैं। अनुसूचित जाति के लोगों के उत्‍थान तथा उनके साथ हुए अन्‍याय के खिलाफ वे हमेशा संघर्षशील रहे हैं।

cm mp Shivraj Singh Chauhan : The Honeble Chief Minister Of Madhya Pradesh-श्री शिवराज सिंह चौहान का जन्‍म ५ मार्च, १९५९ को सीहोर जिले के ग्राम जैत में एक किसान परिवार में हुआ। उनके पिता का नाम श्री प्रेम सिंह चौहान और माता का नाम श्रीमती सुंदर बाई है। वर्ष १९९२ में उनका विवाह श्रीमती साधना सिंह के साथ हुआ। आपके दो पुत्र हैं। श्री चौहान एम.ए. (दर्शन शास्‍त्र) तक शिक्षित, बरकतउल्‍ला विश्‍वविद्यालय के गोल्‍ड मेडलिस्‍ट हैं। श्री चौहान बचपन से ही राष्‍ट्रीय भावना और भारतीय जीवन मूल्‍यों से ओतप्रोत और पर:दुखकातर रहे हैं।

श्री चौहान वर्ष १९७५ में माडल हायर सेकेण्‍डरी स्‍कूल टी.टी. नगर भोपाल के छात्र संघ के अध्‍यक्ष रहे। उन्‍होंने आपातकाल के विरूद्ध भूमिगत आंदोलन में भाग लिया जिसके कारण वे १९७६–७७ में भोपाल जेल में बंदी रहे। जन समस्‍याओं के समाधान के लिए विभिन्‍न आंदोलनों में भाग लेने पर उन्‍होंने अनेक बाद जेल यात्राएं की। श्री चौहान १९७७ से राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक हैं। वे १९७७–७८ में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के संगठन मंत्री नियुक्‍त हुये। वे १९७८ से १९८० तक अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के मध्‍यप्रदेश के संयुक्‍त मंत्री रहे।

श्री शिवराज सिंह चौहान १९८० से १९८२ तक अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के म.प्र. के महासचिव, १९८२–८३ में परिषद की राष्‍ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्‍य, १९८४–८५ में भारतीय जनता युवा मोर्चा, मध्‍यप्रदेश के संयुक्‍त सचिव, १९८५ से १९८८ तक महासचिव तथा १९८८ से १९९१ तक म.प्र. युवा मोर्चा के अध्‍यक्ष रहे। श्री चौहान १९९०–९१ में पहली बार बुधनी विधानसभा से विधायक चुने गये। वे १९९१ में विदिशा संसदीय क्षेत्र से पहली बार सांसद चुने ये। श्री चौहान १९९१–९२ से अखिल भारतीय केशरिया वाहिनी के संयोजक रहे तथा १९९२ में अखिल भारतीय जनता युवा मोर्चा के महासचिव बने। वह १९९२ से १९९४ तक म.प्र. भारतीय जनता पार्टी के महासचिव नियुक्‍त हुये। वे १९९२ से १९९६ तक मानव संसाधन विकास मंत्रालय की परामर्शदात्री समिति, १९९३ से १९९६ तक श्रम और कल्‍याण समिति के सदस्‍य तथा १९९४ से १९९६ तक हिन्‍दी सलाहकार समिति के सदस्‍य रहे।

श्री शिवराज सिंह चौहान ११वीं लोकसभा में १९९६ में विदिशा संसदीय क्षेत्र से पुन: सांसद चुने गये। सांसद के रूप में १९९६–९७ में नगरीय एवं ग्रामीण विकास समिति, मानव संसाधन विकास विभाग की परामर्शदात्री समिति तथा नगरीय एवं ग्रामीण विकास समिति के सदस्‍य रहे। श्री चौहान १९९८ में विदिशा संसदीय क्षेत्र से ही तीसरी बार १२वीं लोकसभा के लिए सांसद चुने गये। वह १९९८–९९ में प्रांक्‍कलन समिति के सदस्‍य रहे। श्री चौहान १९९९ में विदिशा से ही चौथी बार १३वीं लोकसभा के लिये सांसद निर्वाचित हुये। वे १९९९–२००० में कृषि समिति के सदस्‍य तथा १९९९–२००१ में सार्वजनिक उपक्रम समिति के सदस्‍य रहे। श्री चौहान २००० से २००३ तक भारतीय युवा मोर्चा के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष रहे। इस दौरान वे सदन समिति (लोकसभा) के अध्‍यक्ष तथा भाजपा के राष्‍ट्रीय सचिव रहे। श्री चौहान २००० से २००४ तक संचार मंत्रालय की परामर्शदात्री समिति के सदस्‍य रहे। श्री शिवराज सिंह चौहान पांचवी बार विदिशा से १४वीं लोकसभा के सदस्‍य निर्वाचित हुये।

वह वर्ष २००४ में कृषि समिति, लाभ के पदों के विषय में गिठत संयुक्‍त समिति के सदस्‍य, भाजपा के राष्‍ट्रीय महासचिव, भाजपा संसदीय बोर्ड के सचिव, केन्‍द्रयी चुनाव समिति के सचिव तथा नैतिकता विषय पर गठित समिति के सदस्‍य रहे। आप लोकसभा की आवास समिति के भी अध्‍यक्ष रहे।

श्री चौहान २००५ में म.प्र. भारतीय जनता पार्टी के अध्‍यक्ष नियुक्‍त किये गये। पेशे से किसान, श्री शिवराज सिंह चौहान सांस्‍कृतिक, सामाजिक और धार्मिक गतिविधियों में समर्पित रूप से सक्रिय रहे हैं। वे पिछले करीब पंद्रह वर्षों से गरीब कन्‍याओं का सामूहिक विवाह कराते आ रहे हैं। अनुसूचित जाति के लोगों के उत्‍थान तथा उनके साथ हुए अन्‍याय के खिलाफ वे हमेशा संघर्षशील रहे हैं। झुग्‍गी झोपडि़यों के विकास से संबंधित योजनाओं के क्रियान्‍वयन तथा सामाजिक सौहार्द को बढ़ाने में श्री चौहान प्रयासशील रहे हैं। श्री चौहान की संगीत, आध्‍यात्मिक साहित्‍य के अध्‍ययन, वाद–विवाद तथा चर्चाओं में भाग लेने में विशेष रूचि है। उन्‍हें पर्यटन स्‍थलों के भ्रमण, संगीत, गीत सुनने तथा फिल्‍में देखने का भी शौक है। उनके प्रिय खेल कबड्डी, क्रिकेट तथा बालीबाल है।

श्री चौहान को २९ नवंबर,२००५ को मध्‍यप्रदेश के मुख्‍यमंत्री पद की शपथ दिलायी गयी।

श्री चौहान ६ मई २००६ को बुधनी (जिला सीहोर) विधानसभा क्षेत्र से मध्‍यप्रदेश विधानसभा के लिए निर्वाचित हुए।

शिवराज सिंह चौहान को प्रदेश की ग्रामीण जनता ने एक विशिष्ट नाम दिया है ‘‘पांव पांव वाला भैया’’ । राजनैतिक जीवन के शुरूवाती दौर में शिवराज सिंह ने ठेठ देशी अंदाज में प्रदेश के ग्रामीण अंचलों का सघन दौरा किया है। गांव के चबूतरों, मंदिरों, स्कूलों में शिवराज सिंह ने गांव वालों की समस्यायें सूनी है। समस्याओं के सतत निराकरण के लिए जगह–जगह आंदोलन किए हैं इस दौरान अपनी संगी साथियों के साथ उन्होंने कई रातें खुले दालान में पेड़ के नीचे और मंदिर व स्कूल परिसरों में गुजारी हैं। जनसंपर्क की उनकी इस लगन के कारण गांववासियों ने उन्हें पुकारा ‘‘पांव पांव वाला भैया’’ । सबसे अनूठी बात यह है कि मुख्यमंत्री बनने के बाद भी जनता से सीधे संवाद की परंपरा उन्होंने एक जनसेवक होने के नाते कायम रखी है। वे प्रदेश के इतिहास में अकेले ऐसे मुख्यमंत्री हैं जो अपने विशिष्ट कार्यकाल में प्रदेश के अधिकांश जिलों के हजारों छोटे–छोटे गांव में भी पहुंचे हैं। वे अकेले ऐसे मुख्यमंत्री भी है जिन्होंने अपने सरकारी निवास पर अलग–अलग समुदाय के लोगों के अनेक पंचायतें आयोजित की।

मध्यमवर्गीय किसान परिवार

शिवराज सिंह के पिता श्री प्रेम सिंह चौहान व काका श्री पोहत सिंह आज भी जैत गांव में रहते हैं और पुस्तैनी खेती बाड़ी करने हैं। उनका कवेलू वाला मकान और मध्यमवर्गीय रहन सहन देखकर यह आभास ही नहीं होता कि यह प्रदेश के मुख्यमंत्री का पैतृक निवास है। उनके काका बतातें हैं कि शिवराज सिंह मुख्यमंत्री बने तो दूसरे ही दिन पहरेदारी के लिए पुलिस आ गयी। हमें लगा कि हम जेल में है। हमने पुलिस वालों को यह कहकर लौटा दिया कि तीन पीढि़यों से जिन ग्रामीण लोगों के साथ हम रह रहे हैं जिनके साथ शिवराज बड़े हुए हैं वे लोग हमारी रक्षा करने में पर्याप्त रूप से सक्षम हैं। हम जैसे हैं हमें वैसा ही रहने दें।

जैत की ज्योति

पिता श्री प्रेम सिंह चौहान बतातें हैं कि शिवराज की टोली बचपन में भी खुब उधम मचाती थी, पर इनके खेल में भी अलग मतलब छुपा होता था। शिवराज की उम्र नौ दस साल थी। नर्मदा के तट पर एक दिन बूढ़े बाबा के चबूतरे पर उन्होंने ग्रामीण मजदूरों को इकट्ठा किया और उनसे बोले–‘‘दो गुना मजदूरी ना मिले तो आज से काम बंद कर दो’’ मजदूरों का जलूस लेकर शिवराज नारे लगाते हुए सारे गांव में घूमें। घर लौटे तो चाचा आग बबूला हो रहे थे क्योंकि परिवार के मजदूरों ने भी हड़ताल कर दी थी। शिवराज की पिटाई करते हुए पशुओं के बाड़े में ले गये और डांटते हुए बोले ’ अब तुम इन पशुओं का गोबर उठाओ, इन्हे चारा डालो, जंगल ले जाओ’ शिवराज ने ये सब काम पूरी लगन से किये पर मजदूरों को तब तक काम पर नहीं आने दिया जब तक सारे गांव ने उनकी मजदूरी नहीं बढ़ा दी।

राजनीतिक सफर

शिवराज सिंह को भोपाल के मॉडल हायर स्कूल में दाखिला दिलवाया गया। भोपाल में वे रोज सुबह राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की शाखा में जाने लगे हांलाकि तब उनकी उम्र बहुत कम थी, यही वह देव योग है जिसने उन्हें राजनीति में इस ऊंचाई तक पहुंचाया है। संघ अधिकारी ने शिवराज सिंह की परीक्षा लेने की मंशा से उन्हें मैदान साफ करने का काम सौंपा। किसी भी काम को छोटा ना मानने वाले शिवराज सिंह को यह इतना राश आया कि वे शाखा लगने से पहले रोज मैदान में झाडू लगा देते थे। उनकी कर्मठता, समर्पण व लगन से प्रभावित होकर संघ अधिकारियों ने उन्हे नेतृत्व के लिए उन्हें तराशना शुरू कर दिया। सन् 1975 में संघ से जुड़ने वाले शिवराज सिंह आज भी राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ को अपने अनुशासित सार्वजनिक जीवन एवं संयमित निजी जीवन की पहली पाठशाला मानते हैं।

सबसे कम उम्र के मीसा बंदी

11वीं कक्षा के छात्र शिवराज सिंह सबसे कम उम्र के मीसा बंदी के रूप में सेंट्रल जेल भोपाल पहुंचे। उनके पिता बताते हैं कि ग्रामीण परिवेश की मेरी मां को इससे गहरा सदमा लगा वे परेशान हो गयी कि सोलह वर्ष के उनके पोते ने ऐसा अपराध क्यों किया कि पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। शिवराज सिंह से सरकार ने कहा कि वे माफी मांग लें तो रिहा हो सकते हैं पर संघ के दिए संस्कार इतने मजबूत थे कि वे शिवराज सिंह को डिगा भी नहीं सके। शिवराज सिंह का कहना था कि अभिव्यक्ति मेरा अधिकार है और मैने कोई अपराध नहीं किया है तो मैं क्यूं मांफी मांगू।

वरिष्ठ लोगों के नजरों में शिवराज

राजमाता बोली–‘बेटा हो तो ऐसा’

छात्र राजनीति के दौरान शिवराज सिंह चौहान ने सैकड़ो छोटे बड़े आंदोलनों में हिस्सा लिया तो कई का नेतृत्व भी संभाला। इनमें से जिन दो आयोजनों ने उनका राजनैतिक कद बढ़ाया वे हैं– सन् 1988 में आयोजित क्रांति मशाल यात्रा। प्रदेश में जन चेतना की अलख जगाते हुए भारतीय जनता युवा मोर्चा की इस विशाल मशाल यात्रा का विधानसभा के समक्ष प्रदर्शन के साथ समापन होना था। तय हुआ कि भाजपा के वरिष्ठ नेता लिली टॉकीज, भोपाल चौराहे पर मशाल यात्रा का स्वागत करेंगे।

आदरणीय कुशाभाऊजी ठाकरे, आ. श्री प्यारेलाल जी खंडेलवाल एवं श्री नारायण प्रसाद जी गुप्ता ने शिवराज सिंह से कहा तुम्हारी जिद पर हमने राजमाता श्रीमती विजयाराजे सिंधिया को बुला लिया है पर यह तो बताओं कि क्रांति मशाल यात्रा के समापन पर कितने युवा इकट्ठे होंगे? शिवराज सिंह बोबे–चालीस हजार से ज्यादा। पार्टी के वरिष्ठ नेता चौंक उठे और बोले–सड़क पर चालीस हजार की भीड़ तुमने कभी एक साथ देखी है। शिवराज सिंह ने आदतन नजर ही उठाई पर नजरें मिलाने वाला जवाब विनम्रता के साथ दिया– कल सुबह देख लूंगा। 7 अक्टूबर 1988 भोपाल के राजनैतिक इतिहास का हिस्सा बच गया। राजमाता माइक संभाल चुकी थी और शिवराज ससिंह को देखते ही बोली –मैं मां हूं, हर मां अपने आंचल में जैसी संतान संजोने का सपना देखती है यह शिवराज है। मेरे लिए अभी भी कल्पनातीत है कि किसी के बुलावे पर इतने युवक अपने खर्च पर भोपाल आवें और अनुशासित जन सैलाब में बदल जायें। मैं जिधर नजर दौड़ा रही हूं मुझे भारत का भविश्य दिखाई दे रहा है। उन्होंने श्री कुशाभाऊ ठाकरे की तरफ देखते हुए बोला आदरणीय ठाकरे जी ’ये कोहिनूर आपने अब तक कहां छुपा रखा था, राजनीति में ऐसे कर्मठ एवं युवा कार्यकर्ताओं की कमी हो गयी है।’’

अटल, आडवाणी बोल उठे अद्भुत

शिवराज सिंह भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनें तो उन्होंने स्वप्न संजोया कि उन्होंने एक लाख युवाओं का राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित करेंगे। ठाकरे जी से अनुमति मांगने पर उन्होंने पूछा कितना खर्च करोगे? उन्होंने कहा एक लाख युवक आयेंगे तीन दिन रूकेंगे, उन्हें भाजपा के इतिहास का साहित्य भी वितरित किया जायेगा एवं एक प्रदर्शनी भी लगाई जायेगी। उसमें लगभग 35 से 40 लाख रूपया खर्च होगा। ठाकरे जी ने बोला कि एक आयोजन पर पार्टी इतना खर्च नहीं कर सकती। शिवराज सिंह ने विनम्रता से जवाब दिया इस सम्मेलन में आने वाले हर सदस्य से सौ रूपये प्रवेश शुक्ल लिया जायेगा करीब दस लाख तो हम इक्कठा कर लेंगे शेष आप स्वीकृत करें। आगरा में आयोजित इस सम्मेलन की पूर्व तैयारी के लिए शिवराज सिंह ऐसे जुटे कि डेढ़ माह के लिए सारी दुनिया भूल गये। उनके सहयोगियों ने आगरा में एक नगर ही बसा दिया। देश में जितने प्रदेश हैं इस नगर में उतने ही उप नगर बन गये। प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, गृह मंत्री लालकृष्ण आडवाणी इस सम्मेलन में आये। आगरा में लैंड करने के पहले शहर का हवाई अवलोकन किया तो वे बोल उठे ’’अद्भुत’’।

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Working as Associate Editor of Bhartiya Paksha, a monthly magazine published from New Delhi. To know more click to

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