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उनके नेतृत्व में गुजरात ने शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि इत्यादि के क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की। उनके विकास कार्यो की बदौलत ही लोगों ने उन्हें दुबारा मुख्यमंत्री के रूप में चुना। उन्होंने 22 दिसंबर 2002 को फिर से मुख्यमंत्री की शपथ ली। लोगों ने उनसे जो उम्मीद की थी उससे ज्यादा उन्होंने दिया। |
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-उत्तरी गुजरात के मेहसाना जिले में एक छोटा सा नगर है जिसे वादनगर कहते हैं। यही पर नरेन्द्र मोदी का जन्म 17 सितम्बर 1950 को हुआ। नरेन्द्र मोदी एक ऐसे माहौल में पले बढ़े जो समाज सेवा से परिपूर्ण था। समाज सेवा की भावना नरेन्द्र मोदी के अंदर कूट-कूट कर भर गई। इसी का परिणाम था कि जब 60 दशक के दौरान भारत-पाकिस्तान में युद्ध छिड़ा तो नरेन्द्र मोदी ने रेलवे स्टेशन पर सैनिक की सेवा की। 1967 में जब गुजरात में बाढ़ आई तो नरेन्द्र मोदी बाढ़ प्रभावितों के दुख दर्द को दूर करने में अपना योगदान देने लगे।
संगठन के लिहाज से महत्वपूर्ण अपनी तमाम खूबियों के बदौलत अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के नेता बन गये। उन्होंने परिषद के आधार पर गुजरात में कई सामाजिक और राजनीतिक कार्यो को अंजाम दिया।
बचपन से ही उनके सामने कई विपरीत परिस्थितियां आई लेकिन उन्होंने हर विपरीत परिस्थितियों को एक अवसर के रूप में परिवर्तित किया। वे उनसे कभी टूटे नहीं। उच्च शिक्षा के दौरान स्थिति पढ़ाई के छूटने तक आ गई थी लेकिन उन्होंने पढ़ाई नहीं छोड़ी और संघर्ष करते हुए राजनीति विज्ञान में एम. ए. किया।
बाद में नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को स्वयं को सर्मपित कर दिया और देश के सामाजिक और सांस्कृतिक उत्थान में संघ के मार्गदर्शन में कार्य करने लगे। संघ के तत्वाधान में मोदी ने कई सराहनीय कार्य किये। 1974 में जब भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन चला तो मोदी ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया। इमेरजेंसी के दौरान अपने विद्रोही तेवरों की खातिर वे भूमिगत हो गये वो वहां से केन्द्र सरकार के नाजीवाद कार्यो को समाप्त करने के लिए प्रयास करने लगे।
1987 में वो मुख्यधारा की राजनीति में आये। उन्होंने इस समय भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ली। वे गुजरात में भाजपा के महासचिव बनाये गये। उन्होंने पार्टी के कार्यकर्ताओं के अंदर जोश और उत्साह भर दिया। पार्टी का दायरा बढ़ाने उन्होंने अपना भरपूर योगदान दिया। 1990 में जो सयुक्त सरकार बनी उसमें भाजपा भी एक थी। 1995 में गुजरात में भाजपा की सरकार बनी और तब से लेकर अब तक चल रही है।
1988 से 1995 तक मोदी एक ऐसे काबिल व्यक्ति के रूप में उभरे जो अचूक रणनीतियां बनाता था और जिसने गुजरात में भाजपा को मजबूत बनाने का कार्य किया। इस दौरान मोदी ने दो अति महत्वपूर्ण कार्यो की जिम्मेदारी निभाई। श्री लाल कृष्ण आडवाणी की सोमनाथ से अयोध्या तक की रथ यात्रा का आयोजन की जिम्मेदारी और कन्याकुमारी से कश्मीर की यात्रा की जिम्मेदारी। 1998 में भाजपा की सरकार केन्द्र में बनी उसमें इन दोनों यात्राओं का बहुत भारी योगदान रहा।
मोदी को भाजपा पार्टी को मजबूत करने के लिए कई राज्यों में जनाधार बढ़ाने का कार्य सौंपा गया जिसे उन्होंने बखूबी अंजाम दिया। जम्मू कश्मीर और भारत के पूर्वोत्तर सात राज्यों जैसे संवेदनशील स्थानों पर भी उन्होंने नीर्भिकता के साथ काम किया। मोदी पार्टी के एक अच्छे प्रवक्ता के रूप में भी सामने आये।
अक्टूबर 2001 में वो गुजरात के मुख्यमंत्री पद को संभालने की जिम्मेदारी दी गई। 2001 के जनवरी में आये राज्य में भूकंप की वजह और अन्य वजहों से गुजरात की आर्थिक स्थिति बहुत डांवाडोल हो चुकी थी उस समय। मोदी ने अपनी दूरदर्शिता और परिश्रम के कारण गुजरात को आर्थिक ऊंचाइयों पर पहुंचाने का सफल प्रयत्न किया।
उनके नेतृत्व में गुजरात ने शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि इत्यादि के क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की। उनके विकास कार्यो की बदौलत ही लोगों ने उन्हें दुबारा मुख्यमंत्री के रूप में चुना। उन्होंने 22 दिसंबर 2002 को फिर से मुख्यमंत्री की शपथ ली। लोगों ने उनसे जो उम्मीद की थी उससे ज्यादा उन्होंने दिया।
सोइल हेल्थ कार्ड, रोमिंग राशन कार्ड और स्कूल कार्ड जैसे नये तरीके भी उन्होंने अपनाये लोगों की जिंदगी को बेहतर बनाने के लिए। इसके अलावा कृषि महोत्सव, चिरंजीवी योजना, बेटी बचाओ जैसी कई फायदेमंद योजनाएं उन्होंने चालू की।
नरेन्द्र मोदी की याददाश्त बहुत तेज है। जिसे वे एक बार मिल लेते हैं उसका नाम वे कभी नहीं भूलते, यही चीज उन्हें लोकप्रिय बना देती है। उनके प्रतिद्वंदी भी उनकी काबिलियत की तारीफ करते हैं। नरेन्द्र मोदी के प्रयासो का नतीजा है कि आज गुजरात में भारी मात्रा में विदेशी निवेश हो रहा है।

























