सत्य साई बाबा

23 मई 1940 को उनकी दिव्यता का भान सबको हुआ। उन्हों घर के सभी सदस्यों को बुलाया और चमत्कार दिखाने लगे। उनके पिता को लगा कि उनके बेटे पर किसी भूत की सवारी आ गई है। उन्होंने एक छड़ी ली और सत्यनारायण से पूछा कि कौन हो तुम? सत्यनारायण ने कहा, ''मैं साई बाबा हूं।''

Swami 200x153 सत्य साई बाबा आज दुनिया जिन्हें सत्य साई बाबा के नाम से जानती है उनके बचपन का नाम सत्यनारायण राजू था। उनकी माता का नाम ऐश्वरमा और पिता का नाम पदवेंकम राजू रत्नाकरम था। उनका जन्म आन्ध्र प्रदेश के पुत्तपार्थी गांव में हुआ।

बचपन में लोगों को उनकी बुद्धिमता और दयालु स्वभाव का पता चल गया उनकी गतिविधियों से। उनके अंदर संगीत, नृत्य, गायन, लेखन आदि के गुण मौजूद थे जो लोगों के बीच प्रकट हो जाते थे। ऐसा कहा जाता है कि वे बचपन में ही हवा से मिठाई और खाने पीने की अन्य चीजे उत्पन्न कर देते थे।

सत्यनारायण ने अपने गांव में तीसरी कक्षा तक पढ़ाई की। फिर उसके बाद वे बुक्कापटनम के स्कूल चले गये। 8 मार्च 1940 को जब वे कही जा रहे थे तो उनको एक बिच्छू ने डंक मार दिया। वे काफी घंटे तक अचेत पड़े रहे। उसके बाद के कुछ दिनों में उनके व्यक्तित्व में परिवर्तन देखने को मिला। वे कभी हंसते कभी रोते तो कभी गुमसुम हो जाते। उन्होंने संस्कृत में बोलना शुरू कर दिया जिसे वे जानते भी नहीं थे। डाक्टरों ने सोचा उन्हें हिस्टीरिया हो गया है। उनके पिता ने उन्हें कई संतों, डाक्टरों और ओझाओं से दिखाया लेकिन कोई परिवर्तन नहीं आया।

23 मई 1940 को उनकी दिव्यता का भान सबको हुआ। उन्हों घर के सभी सदस्यों को बुलाया और चमत्कार दिखाने लगे। उनके पिता को लगा कि उनके बेटे पर किसी भूत की सवारी आ गई है। उन्होंने एक छड़ी ली और सत्यनारायण से पूछा कि कौन हो तुम? सत्यनारायण ने कहा, ”मैं साई बाबा हूं।”

उन्होंने अपने आप को शिरडी साई बाबा का अवतार घोषित किया। गौरतलब है कि शिरडी साई बाबा का देहावसाहन उनके जन्म के 8 साल पहले हुआ था।

सत्य साई बाबा के पास श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगी। हर वीरवार को उनके घर पर भजन होने लगा जो बाद में पूरे सप्ताह में तब्दील हो गया। उन्होंने मद्रास और दक्षिण भारत के अन्य हिस्सों की यात्रा की। उनके कई सारे भक्त हो गये।

1944 में सत्य साई के एक भक्त ने उनके गांव के नजदीक उनके लिए एक मंदिर बनाया जो आज पुराने मंदिर के नाम से जाना जाता है। वर्तमान के आश्रम प्रशांति निलयम का निर्माण कार्य 1948 में शुरू हुआ और 1950 में समाप्त हुआ। 1957 में साई बाबा उत्तरी भारत के दौरे पर गये। 1954 में बाबा ने गांव में ही एक अस्पताल की स्थापना की।

1963 में उन्हें कई बार दिल के दौरे पड़े। ठीक होने पर उन्होंने घोषित किया कि वे कर्नाटक प्रदेश में प्रेम साई बाबा के रूप में पुन: अवतरित होंगे।

29 जून 1968 को उन्होंने अपनी पहली और एकमात्र विदेश यात्रा की। वे युगांडा गये। 1968 में उन्होंने मुम्बई में धर्मक्षेत्र मंदिर की स्थापना की। 1995 में उन्होंने अनन्तपुर क्षेत्र में पानी परियोजना का शुभारंभ किया ताकि क्षेत्र में पानी की समस्या को समाप्त किया जा सके। इसी तरह उन्होंने जगह जगह जन कल्याणकारी कार्य किये।

सत्य साई के प्रमुख आश्रम पुत्रपार्थी में अब्दुल कलाम, अटल बिहारी वाजपेयी, येदुरप्पा इत्यादि जैसे राष्ट्रीय स्तर के नेता ठहर चुके हैं।

बाबा आमतौर पर तो पुत्तपार्थी आश्रम में ही रहते हैं लेकिन गर्मियों में वे बंगलौर के नजदीक कडुगोडी में स्थित आश्रम में चले जाते हैं।

सत्य साई बाबा के 166 देशों में विद्यालय, अस्पताल और अन्य जन कल्याणकारी कार्य चल रहे हैं। सत्य साई बाबा अपने शिष्यों से कहते हैं कि उन्हें अपना धर्म और अपना ईष्ट छोड़ने की आवश्यकता नहीं है।

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Working as Associate Editor of Bhartiya Paksha, a monthly magazine published from New Delhi. To know more click to

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