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डा. रमन सिंह भ्रष्टाचार के सख्त खिलाफ हैं। अपने शासन में उन्होंने भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम चलाई। इस कारण उन्हें लोग 'मिस्टर क्लीन' कहने लगे। उनकी इसी छवि का परिणाम था कि जब 2008 में छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव हुए तो उनकी पार्टी को जीत हासिल हुई और उन्होंने दोबारा मुख्यमंत्री की शपथ ली। |
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छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह का जन्म 15 अक्टूबर 1952 को हुआ। डा. रमन सिंह के पास आयुर्वेदिक डीग्री है। उन्होंने अपने युवा काल में भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ली जो उस समय भारतीय जनसंघ के नाम से जानी जाती थी।
अपनी मेहनत और काबिलियत के बलबूते पर वे पहले निगम पार्षद बने और फिर विधायक। 1999 में छत्तीसगढ़ की रंजनगांव लोकसभा से जीते। इस जीत के साथ उनके राजनीतिक जीवन में उछाल आया। अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में जब केन्द्र में सरकार बनी तो डा. रमन सिंह को वाणिज्य और उद्योग राज्य मंत्री की जिम्मेदारी दी गई।
उसके बाद वे छत्तीसगढ़ के भाजपा अध्यक्ष बनाये गये। उनकी देख-रेख में छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव 2003 सम्पन्न हुए। इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को जीत मिली। उस समय छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के पद के लिए दो लोग दावेदार थे जिनमें एक रमन सिंह थे और दूसरे दिलिप सिंह जूदोई। दिलिप सिंह के ऊपर भ्रष्टाचार का आरोप लगा। इस कारण स्थानीय भाजपा नेताओं ने मुख्यमंत्री के रूप में डा. रमन सिंह का नाम आगे बढ़ाया और वे छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री बने।
2005 में उन्होंने छत्तीसगढ़ में नक्सली आंदोलन पर बैन लगा दिया। विपक्षी पार्टी के नेता महेन्द्र कर्मा का द्वारा चलाये जा रहे आंदोलन ‘सलवा जुदुम’ को वैधानिक दर्जा प्रदान किया।
डा. रमन सिंह भ्रष्टाचार के सख्त खिलाफ हैं। अपने शासन में उन्होंने भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम चलाई। इस कारण उन्हें लोग ‘मिस्टर क्लीन’ कहने लगे। उनकी इसी छवि का परिणाम था कि जब 2008 में छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव हुए तो उनकी पार्टी को जीत हासिल हुई और उन्होंने दोबारा मुख्यमंत्री की शपथ ली।

























