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जब वे पशु चिकित्सा में मास्टर डीग्री के लिए पढ़ाई कर रहे थे जब उन्होंने पूर्णकालिक स्वयंसेवक बनने का फैसला लिया। इस फैसले के कारण उन्हें अपनी पढ़ाई छोड़नी पड़ी। ये 1975 की बात है जब इंदिरा गांधी ने देश में आपातकाल लागू कर दिया था। |
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन मधुकर भागवत का जन्म 1950 में हुआ। उनका जन्म महाराष्ट्र के चन्द्रपुर नगर में हुआ। वो संघ की पृष्ठभूमि में पले बढ़े। उनके पिता मधुकर भागवत चन्द्रपुर क्षेत्र के प्रमुख थे। उन्होंने गुजरात में प्रांत प्रचारक के रूप में भी काम किया था। ये मधुकर जी ही थे जिन्होंने लाल कृष्ण आडवाणी को संघ परिवार से जोड़ा था। मोहन भागवत के एक भाई चन्द्रपुर शहर इकाई के प्रमुख भी हैं।
मोहन भागवत ने अपनी शिक्षा लोकमान्य तिलक विद्यालय से सम्पन्न की। फिर उन्होंने जनता कॉलेज से बीएससी का प्रथम वर्ष किया। विद्यालय और कालेज दोनों ही चन्द्रपुर में स्थित हैं। पंजाबराव कृषि विद्यापीठ से उन्होंने पशु चिकित्सा में स्नातक की डीग्री ली। जब वे पशु चिकित्सा में मास्टर डीग्री के लिए पढ़ाई कर रहे थे जब उन्होंने पूर्णकालिक स्वयंसेवक बनने का फैसला लिया। इस फैसले के कारण उन्हें अपनी पढ़ाई छोड़नी पड़ी। ये 1975 की बात है जब इंदिरा गांधी ने देश में आपातकाल लागू कर दिया था।
आपातकाल के दिनों में मोहन भागवत ने भूमिगत होकर काम किया। उसके बाद वे महाराष्ट्र के अकोला क्षेत्र में प्रचारक बन गये। उसके बाद उन्होंने नागपुर और विभद्र क्षेत्र में प्रचारक के रूप में काम किया। पूरे भारत के स्वयंसेवकों के शारीरिक अभ्यास प्रशिक्षण के इंजार्च बने।
2000 में जब राजेन्द्र सिंह ने सरसंघचालक और एच वी शेषाद्री ने महासचिव का पद स्वास्थ्य के कारणों से छोड़ा तो के एस सुदर्शन सरसंघचालक और मोहन भागवत तीन वर्ष के लिए महासचिव बने। कार्यकाल खत्म होने बाद मोहन भागवत को दोबारा ये जिम्मेदारी उठाने के लिए चुना गया।
2009 में मोहन भागवत को सरसंघचालक की जिम्मेदारी सौपी गई।
मोहन भागवत के बारे में कहा जाता है कि वे अन्य संघ के नेताओं के मुकाबले ज्यादा आधुनिक विचारों के हैं। उन्होंने भारत के कोने कोने की यात्रा की है। विदेशों में भी वो गये हैं।
मोहन भागवत का मानना है कि व्यक्ति और संस्था को वक्त के साथ बदलना चाहिए लेकिन अपनी परम्पराओं और मूल्यों को नहीं भूलना चाहिए।
भारत में विद्यमान जाति प्रथा पर टिप्पणी करते हुए वे कहते हैं कि छूआछूत एक बुराई है और समाज में इसका अस्तित्व नहीं रहना चाहिए।
भागवत चेहरे से तो नहीं लेकिन अपनी विशेष मूछो की वजह से संघ स्थापक डा. हेडगेवार के प्रतिरूप लगते हैं। शास्त्रीय संगीत में उनकी विशेष दिलचस्पी है। वे ताल और राग के अच्छे जानकार हैं। वे गायक भी हैं। मूलरूप से शारीरिक से जुड़े होने के बाद भी उनके बौद्धिक और बैठकें बहुत सरस होती हैं। उनमें हास्य भी होता है और गंभीरता भी। आज उनकी उम्र 59 साल है लेकिन वे नौजवानों की तरह काम करते हैं।
मोहन भागवत ने समाज की सेवा में अपना जीवन व्यतीत करने के उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए विवाह नहीं किया है। मोहन भागवत के दो भाई और एक बहन है। वे भाई बहनों में सबसे बड़े हैं।

























