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अशोक चक्रधर भारत के प्रतिष्ठित कवि और लेखक हैं। वे कवि होने के साथ-साथ जामिया मीलिया इसलामिया में प्राध्यापक भी थे। उनका जन्म 8 फरवरी 1951 को हुआ। अशोक चक्रधर ने कई राष्ट्रीय और अंतराष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त किये हैं। |
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अशोक चक्रधर भारत के प्रतिष्ठित कवि और लेखक हैं। वे कवि होने के साथ-साथ जामिया मीलिया इसलामिया में प्राध्यापक भी थे। उनका जन्म 8 फरवरी 1951 को हुआ।
अशोक चक्रधर ने कई राष्ट्रीय और अंतराष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त किये हैं। उन्होंने अपने आप को टीवी और रेडियो से जोड रखा है। वे कुछ टीवी धरावाहिकों में आ चुके हैं और सब टीवी के कार्यक्रम ‘वाह वाह’ का संचालन भी कर चुके हैं।
2004 में उन्होंने विश्वविद्यालय से सेवा निवृत्ति ले ली थी।
उनकी कई कविताओं की पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं जिनमें प्रमुख हैं- भूरे बच्चे, सो तो है, जो करे सो जोकर, बोल गप्पे इत्यादि।
उन्होंने रंग जमा लो, जब रहा न कोई चारा, जाने क्या टपके इत्यादि नाटक भी लिखे हैं।
इसके अलावा उन्होंने बाल साहित्य को भरपूर बनाने में भी अपना योगदान दिया है। उनकी बच्चों के लिए पुस्तकें है- कोईल का सितार, स्नेहा का सपना, हीरो की चोरी इत्यादि।
युवाओं के लिए भी उन्होंने किताबें लिखी हैं- नई डगर, अपाहिज कौन, हमने मुहिम चलाई, बदल जायेंगी रेखा इत्यादि।
साहित्य की आलोचना में भी उन्होंने अपनी कलम चलाई है- मुक्तिबोध् की काव्य प्रक्रिया, छाया के बाद इत्यादि।
गुलाबरी और बोल बसंतो की पटकथा भी अशोक चक्रधर ने लिखी है।
इसके अलावा अंग्रेजी पुस्तक वाट इज इस्टरी का हिन्दी में अनुवाद उनके द्वारा सम्पन्न हुआ है।
संक्षिप्त परिचय
जन्म:
8 फरवरी 1951, खुर्जा (उ.प्र.) में।
शिक्षा:
एम.ए., एम.लिट., पी-एच.डी. (हिंदी), ‘कैरिअर अवार्ड’ उत्तर पी-एच.डी. शोध-कार्य (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग)
संप्रति:
समंवयक (हिंदी), जीवनपर्यंत शिक्षण संस्थान, दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली 110007
प्रकाशित रचनाएँ:
बूढ़े बच्चे, भोले भाले, तमाशा, चुटपुटकुले, सो तो है, हँसो और मर जाओ, ए जी सुनिए, इसलिए बौड़म जी इसलिए, खिड़कियाँ, बोल-गप्पे, जाने क्या टपके, देश धन्या पंच कन्या, चुनी चुनाई, सोची समझी।
नाटक :
रंग जमा लो, बिटिया की सिसकी, बंदरिया चली ससुराल, जब रहा न कोई चारा, लल्लेश्वरी।
विविध
आप सिडनी यूनिवर्सिटी, सिडनी, आस्ट्रेलिया में विज़िटिंग स्कॉलर, संचालन समिति, हिंदी अकादमी, दिल्ली सरकार, गवर्निंग बॉडी, शहीद भगत सिंह कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली व सांस्कृतिक सचिव, ब्रज कला केंद्र, दिल्ली के सदस्य, काका हाथरसी पुरस्कार ट्रस्ट, हाथरस के ट्रस्टी तथा हिंदी सलाहकार समिति, ऊर्जा मंत्रालय, भारत सरकार, हिमाचल कला संस्कृति और भाषा अकादमी, हिमाचल प्रदेश सरकार, शिमला के भूतपूर्व सदस्य के पदों को सुशोभित कर चुके हैं।

























